Friday, July 15, 2011

एक सपना मैं रोज देखा करता हूँ.

एक सपना मैं रोज देखा करता हूँ,
तुझको ही संग अपने देखा करता हूँ,
याद करके उन लम्हों को, बिताए हैं तेरे साथ,
मैं रोज सोया करता हूँ.
सुबहों को जब सूरज रोशन ये जहान करता है,
मेरी आंखें तेरा दीदार करती हैं,
जब चलते हैं ठंडी हवाओं के झोंके,
मैं तेरी सदा महसूस करता हूँ,
एक सपना मैं रोज देखा करता हूँ.

जाता तो हू मैं रोज मिलने उपरवाले से,
पर उसके दर पे सजदा तेरा करता हूँ,
तू भी तो रब की एक इनायत है,
तुझको ही पूजा हर दम करता हूँ,
एक सपना मैं रोज देखा करता हूँ.

तुझसे बात करना दिल चाहता है,
पर तेरी बोली इसको रोक जाती हैं,
कभी होना न तू दुखी इस जीवन में,
तेरी हंसी की ही दुआ मैं दिल से करवाता हूँ,
एक सपना मैं रोज देखा करता हूँ.

जब भी बात कोई मैं करता हूँ,
वो शुरू और खत्म तुझपे होती है,
तू भले ही मुझको भुला दे अपनी जिंदगी से,
पर मैं तुझको भूल जाऊं, ऐसी खता नहीं कर सकता हूँ,
एक सपना मैं रोज देखा करता हूँ.


शाम होते होते मैं तेरा हो जाता हूँ,
तुझको ही नज़रें हर ओर ढूंडा करती हैं,
मुझमे ही तो तू पूरा समाया है,
खुद में ही तुझे खोजा करता हूँ,
एक सपना मैं रोज देखा करता हूँ.


Monday, July 11, 2011

Am in Hell!

I can’t Live without you..it hurts,
No one can now fill this space in my heart.
Can anyone tell me how to get outta here,
Its feeling like am in Hell yeah!

I don’t know what created a gap between us,
Something is burning in my veins and nerves,
Had  there any medicine , how easy it would be,
Its paining like am in hell yeah!

Why everyone’s finger  is pointing at me , why not?
Coz I am the only responsible for all this shit!
But I do nothing in jealousy nor am a desperado,
Its sinking like am in hell yeah!

तुझको पाना ही है बस मेरी चाहत,मेरी हसरत,
तुझे भुलाकर मैं जाऊंगा कहा ये बता?,
आऊंगा तो तेरे दर पर ही एक गरीब की तरह,
मुझे गले लगाना या रस्ते पर छोड़ दें..सब तुझ पर है,
न जाने वो क्या गलती करी मैंने जो रूठा है तू,
मौला मेरे मना दे मेरे यार को, दिखा दे अपनी फितरत,
यार को पाना ही है बस मेरी चाहत,मेरी हसरत.

I am hurt, I am in fear, I am going to sleep,
May be its my dream when I open my eyes,
Whatever it is, I want to just loose it,
I am dreaming like am in hell yeah!

Sunday, July 10, 2011

जिंदगी बदल सी जाती है...पता चलता नहीं,
कल की ही तो बात थी...पल पल लगता है,
ऐसा भी होगा कभी..सोचा था नहीं,
जिंदगी बदल सी जाती है...पता चलता नहीं.

एक ऐसा वक्त भी था जिंदगी की राहों में,
खुश थे, मस्त थे, न कोई फ़िक्र थी न ही कोई डर,
दुनिया के दस्तूरो से अनजान से थे हम,
यूँ रुख बदलेगा मौसम सोचा था नहीं,
जिंदगी बदल सी जाती है...पता चलता नहीं.

न तुम जानते थे हमें, न हम तुम्हे,
न ही ये सोचा था मिलोगे तुम कभी ऐसे,
जाने क्यों उन अजीब हवाओं से रूबरू हुए थे हम,
सोचा था काश ऐसा हो जाए...पर ‘ऐसा’ तो सोचा था नहीं,
जिंदगी बदल सी जाती है...पता चलता नहीं.

खत्म नही हुई है अभी कहानी यहाँ पर हमारी,
सोचता हू अभी मैं ये ही ... क्या छोड़ दू इसको बाद के लिए,
क्या पता हम साथ में ही बैठ के खिले इनको याद करके,
या याद करें कहीं दूर एक दूसरे से हो के .. ऐसा सोचना है नहीं अभी,
जिंदगी बदल तो जाती है ... कब ये पता चलता नहीं.